बहुत कुछ बाकी था,
और तुम चले गए।
अभी तो अथक प्रयास करने थे ,
और तुम चले गए।
अभी तो सुनहरी जिंदगी के ताने बाने बुनने थे,
और तुम चले गए।
अभी छूना था और आसमान,
और तुम चले गए,
अभी करनी थीं और इबाततें,
और तुम चले गए।
अभी तुम्हें देखना और बाकी था,
अभी खिंचनी थी और लकीरें,
अभी और दूर जाना था,
अभी जीनी थी और जिंदगी,
और तुम चले गए।।
अभी समाज के आईने को लाना था और सुनहरे परदे पर,
और तुम चले गए।।।।

Bahut Sundar!!
ReplyDeleteBhut acchi kavita h ye
ReplyDelete