तुमसे क्यों है मोह प्रिये
क्यों कर ये विछोह प्रिये
क्यों छोड़ा ये देश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
मुझको क्यों न साथ लिया
एकाकी वनवास सहा
क्यों मुझसे विद्वेष प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
कहते हो जीवन क्षणभंगुर
मिलने को फिर क्यों नही आतुर
ये कैसा सन्देश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
क्यों सोयी मैं इतने साल
कैसे काटे विरह के काल
तुम क्या जानो क्लेश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
शायद हमें अलग रहना था
हर पल विरह विछोह सहना था
जीवन अब अवशेष प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।।

बहुत उम्दा रचना!
ReplyDeleteNice one ����
ReplyDeleteThnx all....
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