Friday, May 29, 2020

उर्मिला की मनोव्यथा

तुमसे क्यों है मोह प्रिये
क्यों कर ये विछोह प्रिये
क्यों छोड़ा ये देश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
मुझको क्यों न साथ लिया
एकाकी वनवास सहा
क्यों मुझसे विद्वेष प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
कहते हो जीवन क्षणभंगुर
मिलने को फिर क्यों नही आतुर
ये कैसा सन्देश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
क्यों सोयी मैं इतने साल
कैसे काटे विरह के काल
तुम क्या जानो क्लेश प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।
शायद हमें अलग रहना था
हर पल विरह विछोह सहना था
जीवन अब अवशेष प्रिये
तुमसे क्यों है मोह प्रिये।।
-पदमा

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