कुछ पक रहा था मन में
खुशियों की वेदी पर
दुखों की परत थी
दरक रहा था कुछ जीवन में।
अपनों के साथ थी
मन की ये आस थी
यही सुकोमल राह रहेगी
खुशियां भी अथाह रहेंगी
जीवन बदला राहें बदलीं
पल बदला आशाएं बदलीं
व्यस्त हुए सब अपनेपन में
दरक रहा कुछ जीवन में।
वो स्निग्ध अब स्नेह नही
पहले सा अब नेह नही
तृष्णा में सब जल रहे
नैराश्य भावना में पल रहे
धावल्य नही अब हलचल में
दरक रहा कुछ जीवन में।
हार नही मानूँगी मैं
रार नयी ठानूंगी मैं
ये जीवन उपहास नही
होंगे फिर सब साथ यहीं
खुशिया भरूँगी फिर आँचल में
दरक रहा कुछ जीवन में।
-पदमा
खुशियों की वेदी पर
दुखों की परत थी
दरक रहा था कुछ जीवन में।
अपनों के साथ थी
मन की ये आस थी
यही सुकोमल राह रहेगी
खुशियां भी अथाह रहेंगी
जीवन बदला राहें बदलीं
पल बदला आशाएं बदलीं
व्यस्त हुए सब अपनेपन में
दरक रहा कुछ जीवन में।
वो स्निग्ध अब स्नेह नही
पहले सा अब नेह नही
तृष्णा में सब जल रहे
नैराश्य भावना में पल रहे
धावल्य नही अब हलचल में
दरक रहा कुछ जीवन में।
हार नही मानूँगी मैं
रार नयी ठानूंगी मैं
ये जीवन उपहास नही
होंगे फिर सब साथ यहीं
खुशिया भरूँगी फिर आँचल में
दरक रहा कुछ जीवन में।
-पदमा

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