Sunday, May 31, 2020

मत जाना उस देश रे मन

मत जाना उस देश रे मन
जहाँ न कोई तेरा हो
मत रोना उस जगह जहाँ पर
हंसने वाले मिलते हैं
उर्वर भूमि,नीर सदा हो
बीज वहीँ पर जमते हैं
चांदनी वहीँ दिख पाती है
जहाँ बहुत अँधेरा हो
मत जाना उस देश रे मन
जहाँ न कोई तेरा हो।
मत शोक मनाओ हे अधीर
हैं सब यहाँ दिल के फ़क़ीर
माया से सब घिरे हुए
फटे चीर से सिये हुए
पर अभी है दिनकर चमक रहा
दामिनी सा दमक रहा
धुप तभी खिल पाती है
जब फिर एक सवेरा हो
मत जाना उस देश रे मन
जहाँ न कोई तेरा हो।।।

                         -पदमा

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