Saturday, May 30, 2020

फिर से आना चाहूंगी



फिर से आना चाहूंगी
वचन निभाना चाहूंगी
जिसने मुझको जनम दिया
पोषण का फिर जतन किया
वक़्त परिंदा बनता है
जो जीत गया वो जिन्दा है
जीवन राग बहाऊँगी
फिर से आना चाहूंगी।
सब कुछ सुलझाना है मुझको
पितृ ऋण चुकाना है मुझको
हे ईश्वर मुझको शक्ति दे
थोड़ी सी तो भक्ति दे
राग रागिनी गाऊंगी
फिर से आना चाहूंगी।
जिसने जिसने उपकार किया
जीवन मेरा विस्तार किया
उसका मैं वंदन करती हूं
दूर सही हूं पास नही
हिय से अभिनन्दन करती हूं
नित नए गीत मैं गाऊंगी
फिर से आना चाहूंगी।।
                                     -पदमा

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