Monday, June 1, 2020

मुझे स्वप्न में रहने दो

मुझे स्वप्न में रहने दो
निर्झर सा मुझको बहने दो
शनै शनै लहरों सी चलती
मधुर गीत बनाने दो।
लड़ने दो आंधी से मुझको
 पत्थर से टकराने दो
मत रोको कोई राह मेरी
जीवन का दीप जलाने दो।
हाँ उड़ती हूं तो उड़ने दो
व्यंग बाण तो सहने दो
गिरती हूं तो गिरने दो
मिटती हूं तो मिटने दो।
बनने दो मुझको पत्थर
जाने दो मुझको मुक्त हवा में
खुलकर सांस तो लेने दो
लय संगीत तो देने दो।
फिर फिर ना आने पाऊँगी
यहीं कहीं मिट जाउंगी
जो राह चुनी है मैंने
उसको तो सरल बनाने दो
गीत ख़ुशी के गाने दो।।
                          -पदमा

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