दीप जलाएं, मन में, जीवन में..
उज्ज्वलता दीपक में नहीं, उसके लौ में है.
प्रकाशमान करो असहायों के जीवन को,
प्रस्फुटित करो मन को सुन्दर विचारों से,
कुछ दीपक दीवालों पर सजाओ,
कुछ को अंतर्मन में जलाओ..
सुनो की दीपक क्या कहता है !!
विस्तारित करो हृदय को.. ढूंढो ईश्वर को लौ की रौशनी में..
विशालतम तम को भेद देता जिस तरह,
किसी निर्बल के जीवन में भर दो प्रकाश...
विशाल जलधि की शांति की तरह, ये लौ भी है प्रतिक शांति की..

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